कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एडवोकेट राजेंद्र लोकरा ने लोगों के साथ फूलों की होली खेली
होली आपसी प्रेम और सद्भावना का त्यौहार है-राजेंद्र लोकरा
होलिका दहन से जुड़ी मान्यताएं
होली एक सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक त्योहार है। पूरे भारत में इसका अलग ही जश्न और उत्साह देखने को मिलता है। होली भाईचारे, आपसी प्रेम और सद्भावना का त्योहार है। इस दिन लोग एक दूसरे को रंगों में सराबोर करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का अत्यंत बलशाली राजा था, जो भगवान में बिल्कुल भी विश्वास नहीं रखता था। लेकिन उसका पुत्र प्रहलाद श्री विष्णु का परम भक्त था। एक दिन हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद से तंग आकर, उसे मारने के लिए अपनी बहन होलिका को प्रहलाद के साथ अग्नि में बैठने को कहा, परन्तु होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त होने के बाद भी वह आग में जल गई और भक्त प्रहलाद बच गया। बुराई पर अच्छाई की इसी जीत के बाद ही होलिका दहन का यह त्यौहार मनाया जाने लगा। होलिका दहन के समय ऐसी परंपरा भी है कि होली का जो डंडा गाडा जाता है, उसे प्रहलाद के प्रतीक स्वरुप होली जलने के बीच में ही निकाल लिया जाता है।
इस मौके पर रविदत्त सरपंच दरापुर, सुखबीर पूर्व सरपंच दरापुर, ललित पूर्व सरपंच दरापुर, पूर्व प्रिंसिपल महावीर सिंह, रोहतास पहलवान, अशोक प्रधान,मोतीराम नंबरदार, रामचंद्र नंबरदार, बाबूलाल नंबरदार, पूर्व पंच कृष्ण, करतार फौजी, सतीश नंबरदार, वेद प्रकाश पंच सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे !
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